और आज सूरदास ने ही धोखा दिया। बजरंगी ने चिंतित होकर कहा-अब क्या करना होगा पंडाजी, बताओ?
नायकराम-करना क्या होगा, जैसा किया है, वैसा भोगना होगा। जाकर अपनी घरवाली से पूछो। उसी ने आज आग लगाई थी। जानते तो हो कि सूरे मिठुआ पर जान देता है, फिर क्यों भैरों की मरम्मत नहीं की। मैं होता, तो भैरों को दो-चार खरी-खोटी सुनाए बिना न जाने देता, और नहीं तो दिखावे के लिए सही। उस बेचारे को भी मालूम हो जाता कि मेरी पीठ पर है कोई। आज उसे बड़ा रंज हुआ है,
और आज सूरदास ने ही धोखा दिया। बजरंगी ने चिंतित होकर कहा-अब क्या करना होगा पंडाजी, बताओ?
नायकराम-करना क्या होगा, जैसा किया है, वैसा भोगना होगा। जाकर अपनी घरवाली से पूछो। उसी ने आज आग लगाई थी। जानते तो हो कि सूरे मिठुआ पर जान देता है, फिर क्यों भैरों की मरम्मत नहीं की। मैं होता, तो भैरों को दो-चार खरी-खोटी सुनाए बिना न जाने देता, और नहीं तो दिखावे के लिए सही। उस बेचारे को भी मालूम हो जाता कि मेरी पीठ पर है कोई। आज उसे बड़ा रंज हुआ है,