नहीं तो जमीन बेचने का कभी उसे धयान ही न आया था।
बजरंगी-अरे, तो अब कोई उपाय निकालोगे या बैठकर पिछली बातों के नाम को रोएँ!
नायकराम-उपाय यही है कि आज सूरे आए, तो चलकर उसके पैरों पर गिरो, उसे दिलासा दो, जैसे राजी हो, वैसे राजी करो, दादा-भैया करो, मान जाए तो अच्छा, नहीं तो साहब से लड़ने के लिए तैयार हो जाओ, उनका कब्जा न होने दो, जो कोई जमीन के पास आए, मारकर भगा दो। मैंने तो यही सोच रखा है। आज सूरे को अपने हाथ से बना के
नहीं तो जमीन बेचने का कभी उसे धयान ही न आया था।
बजरंगी-अरे, तो अब कोई उपाय निकालोगे या बैठकर पिछली बातों के नाम को रोएँ!
नायकराम-उपाय यही है कि आज सूरे आए, तो चलकर उसके पैरों पर गिरो, उसे दिलासा दो, जैसे राजी हो, वैसे राजी करो, दादा-भैया करो, मान जाए तो अच्छा, नहीं तो साहब से लड़ने के लिए तैयार हो जाओ, उनका कब्जा न होने दो, जो कोई जमीन के पास आए, मारकर भगा दो। मैंने तो यही सोच रखा है। आज सूरे को अपने हाथ से बना के