उन्हें छोड़कर दूसरा अन्य पुस्तकें मंगवाता-इस प्रकार मराठा, बंगला, हिंदी, पंजाबी, संस्कृत पुस्तकें किसी एक पर बोझ न बनते हुए सभी को पढ़ने के लिए मिलने लगी। प्रति मास प्रायः एकाध पार्सल आने से नई पुस्तकें बार-बार मिलती, जिससे देश की विपुल जानकारी मिलने लगी। मासिक पुस्तक के संबंध में चखचख करनी पड़ती। पीछे बताया गया है कि कौन सी पुस्तक कारागृह में आए, इस संबंध में बारी की कसौटी मूर्खतापूर्ण थी। परंतु बीच में जो एक विवेकी पर्यवेक्षक आया,
उन्हें छोड़कर दूसरा अन्य पुस्तकें मंगवाता-इस प्रकार मराठा, बंगला, हिंदी, पंजाबी, संस्कृत पुस्तकें किसी एक पर बोझ न बनते हुए सभी को पढ़ने के लिए मिलने लगी। प्रति मास प्रायः एकाध पार्सल आने से नई पुस्तकें बार-बार मिलती, जिससे देश की विपुल जानकारी मिलने लगी। मासिक पुस्तक के संबंध में चखचख करनी पड़ती। पीछे बताया गया है कि कौन सी पुस्तक कारागृह में आए, इस संबंध में बारी की कसौटी मूर्खतापूर्ण थी। परंतु बीच में जो एक विवेकी पर्यवेक्षक आया,