उसने पुस्तक परीक्षण के काम में बहुत उदार दृष्टिकोण रखा। मासिक पुस्तकों के संबंध में बारी उसे भी चैंकाता, क्यांेकि वह कमिश्नर को भी सूचित करता कि पर्यवेक्षक राजद्रोही लेखों से भरी मासिक पत्रिकाएं राजबंदियों को देता है। अतः माॅडर्न रिव्यू, इंडियन रिव्यू आदि पुस्तकें हम जब आपस में मंगवाते तब कमिश्नर तक झगड़ना पड़ता। मैं कहता कि वास्तव में हिंदुस्थान सरकार जो मासिक पत्रिकाएं अथवा पुस्तकें जब्त नहीं करती वह राजबंदियों के समान
उसने पुस्तक परीक्षण के काम में बहुत उदार दृष्टिकोण रखा। मासिक पुस्तकों के संबंध में बारी उसे भी चैंकाता, क्यांेकि वह कमिश्नर को भी सूचित करता कि पर्यवेक्षक राजद्रोही लेखों से भरी मासिक पत्रिकाएं राजबंदियों को देता है। अतः माॅडर्न रिव्यू, इंडियन रिव्यू आदि पुस्तकें हम जब आपस में मंगवाते तब कमिश्नर तक झगड़ना पड़ता। मैं कहता कि वास्तव में हिंदुस्थान सरकार जो मासिक पत्रिकाएं अथवा पुस्तकें जब्त नहीं करती वह राजबंदियों के समान