‘रवींद्रनाथ की जीवन-स्मृति’, ‘चित्रा’ आदि पढ़-पढ़कर थक जाने के पश्चात् प्राचीन बंगला के ‘पायरी’ वृत्त को ही आगे चलकर मधुसूदन दत्त ने अमित्राक्षर छंद में रूपांतरित किया। मधुसूदन के ‘मेघनाद वध‘, ‘कुरूक्षेत्र’ आदि गं्रथ पढ़ने के बाद जिस तरह उन्होंने अंगे्रजी के निर्मयमक (ठसंदा टमतेम) की तरह बंगला अमित्राक्षर वृत्त की रचना की, उसी तरह हमें इच्छा होने लगी कि ऐसी मराठी वृत्त रचें जो उसकी अधिक शास्त्रशुद्व वृत्त-प्रवृत्तिा से मिलती-जुलती
‘रवींद्रनाथ की जीवन-स्मृति’, ‘चित्रा’ आदि पढ़-पढ़कर थक जाने के पश्चात् प्राचीन बंगला के ‘पायरी’ वृत्त को ही आगे चलकर मधुसूदन दत्त ने अमित्राक्षर छंद में रूपांतरित किया। मधुसूदन के ‘मेघनाद वध‘, ‘कुरूक्षेत्र’ आदि गं्रथ पढ़ने के बाद जिस तरह उन्होंने अंगे्रजी के निर्मयमक (ठसंदा टमतेम) की तरह बंगला अमित्राक्षर वृत्त की रचना की, उसी तरह हमें इच्छा होने लगी कि ऐसी मराठी वृत्त रचें जो उसकी अधिक शास्त्रशुद्व वृत्त-प्रवृत्तिा से मिलती-जुलती