रूस के जार जैसों के सिंहासन चकनाचूर होने के समाचार कानों में आते ही कर्मशक्ति यों ठाठें मारने लगती कि एक मुक्के से इस कारागार की दीवारें मिट्टी में मिलाकर पूर्वाेक्त हिंदुस्थान का लहराता हुआ वह ध्वज उभारकर मरने-मारने के क्षेत्र में तुरंत कूद पड़ें।
कर्म और निष्क्रियता की परस्पर विरोधी भिडं़त रिक्त मानस के खुले मैदान पर इस तरह सतत चलती रहती कि उसे देखकर कभी-कभी अपने आप पर ही हंसी आती, तथापि यह स्ािल उनके समन्वय का विचार
रूस के जार जैसों के सिंहासन चकनाचूर होने के समाचार कानों में आते ही कर्मशक्ति यों ठाठें मारने लगती कि एक मुक्के से इस कारागार की दीवारें मिट्टी में मिलाकर पूर्वाेक्त हिंदुस्थान का लहराता हुआ वह ध्वज उभारकर मरने-मारने के क्षेत्र में तुरंत कूद पड़ें।
कर्म और निष्क्रियता की परस्पर विरोधी भिडं़त रिक्त मानस के खुले मैदान पर इस तरह सतत चलती रहती कि उसे देखकर कभी-कभी अपने आप पर ही हंसी आती, तथापि यह स्ािल उनके समन्वय का विचार