करने के लिए उचित नहीं है। अतः उस ‘तथापि’ को यहां वैसे ही रोकते हुए अगले वृत्तांत का श्रीगणेश करना ही उचित है।
कारागृह के बाहर चल गं्रथालय
बंदीशाला के गं्रथालय का पहले राजबंदीवानों द्वारा ही उपयोग होता, परंतु साधारण बंदियों में भी कई शिक्षित बंदी होते। इसके अतिरिक्त राजबंदियों के संपर्क से उन लोगों में भी, जिन्होंने इन राजबंदियों के पास ही प्राथमिकता शिक्षा संपादित की थी- कई इस तरह के बुद्विमान निकले कि उनमें इतिहासादि
करने के लिए उचित नहीं है। अतः उस ‘तथापि’ को यहां वैसे ही रोकते हुए अगले वृत्तांत का श्रीगणेश करना ही उचित है।
कारागृह के बाहर चल गं्रथालय
बंदीशाला के गं्रथालय का पहले राजबंदीवानों द्वारा ही उपयोग होता, परंतु साधारण बंदियों में भी कई शिक्षित बंदी होते। इसके अतिरिक्त राजबंदियों के संपर्क से उन लोगों में भी, जिन्होंने इन राजबंदियों के पास ही प्राथमिकता शिक्षा संपादित की थी- कई इस तरह के बुद्विमान निकले कि उनमें इतिहासादि