प्रयत्न नहीं हुआ; लेकिन यह कितने आश्चर्य की बात है कि इन हिंदू बंदियों की तरह उसी बंदी द्वीप में अवश और हताश पड़े मुसलमान बंदी अपने सह-बंदियों को भ्रष्ट करके उन्हें मुसलमान बनाने के लिए उन पर बलात्कार करते, उन पर अत्याचार करते, उन्हें बहकाने का प्रयास करते और वह ईसाई प्रशासन, जो स्वधर्म प्रसारार्थ स्वयं किसी प्रकार की पीड़ा नहीं देता था, परधर्मीय मुसलमानों द्वारा हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों की उपेक्षा करता। वयस्क बंदियों की बात छोड़ दें तो जिन छोटे,
प्रयत्न नहीं हुआ; लेकिन यह कितने आश्चर्य की बात है कि इन हिंदू बंदियों की तरह उसी बंदी द्वीप में अवश और हताश पड़े मुसलमान बंदी अपने सह-बंदियों को भ्रष्ट करके उन्हें मुसलमान बनाने के लिए उन पर बलात्कार करते, उन पर अत्याचार करते, उन्हें बहकाने का प्रयास करते और वह ईसाई प्रशासन, जो स्वधर्म प्रसारार्थ स्वयं किसी प्रकार की पीड़ा नहीं देता था, परधर्मीय मुसलमानों द्वारा हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों की उपेक्षा करता। वयस्क बंदियों की बात छोड़ दें तो जिन छोटे,