कम उम्र बालकों को कालेपानी पर अथवा कारागार में भेजा जाता है, उनके शरीर की, स्वास्थ्य की, उनके नादान होने के कारण सरकार जैसी चिंता करती है, उसी तरह उनकी आत्मा एवं धर्म की चिंता करना और कम-से-कम तब तक, जब तक वे समझदार उम्र के नहीं हो जाते, उनके धर्म का पालन-पोषण करना, अज्ञान की संपति की रक्षा करना एक महत्तवपूर्ण सार्वजनिक कर्तव्य है। परंतु कारा-संस्था में वह सर्वथा दुर्लक्षित होता है, अंदमान की बात छोड़िए, हिंदुस्थान के
कम उम्र बालकों को कालेपानी पर अथवा कारागार में भेजा जाता है, उनके शरीर की, स्वास्थ्य की, उनके नादान होने के कारण सरकार जैसी चिंता करती है, उसी तरह उनकी आत्मा एवं धर्म की चिंता करना और कम-से-कम तब तक, जब तक वे समझदार उम्र के नहीं हो जाते, उनके धर्म का पालन-पोषण करना, अज्ञान की संपति की रक्षा करना एक महत्तवपूर्ण सार्वजनिक कर्तव्य है। परंतु कारा-संस्था में वह सर्वथा दुर्लक्षित होता है, अंदमान की बात छोड़िए, हिंदुस्थान के