मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

डाकू-लुटेरों की चैथी कक्षा तक और अंत में डाकेजनी की टोली में समाविष्ट होने की पांचवीं कक्षा में बढ़ोतरी मिलती है। कारागृह में जाना हो तो इन्हीं बच्चों को भेजा जाता है। महंत सामान्यतया अपने स्थान पर अडिग रहते हैं, न वे कभी किसी के झांसे में आते हैं। यह स्पष्ट निर्देश होता है कि इस विद्यापीठ में नए रिक्रूट की भरती अविरल रूप से होनी चाहिए।

चोरों के अड्डे यदि हिंदुओं के हैं तो मिलते हैं तो उनमें अनाथ, कंगले हिंदू बच्चे जिस तरह मिलते है,


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डाकू-लुटेरों की चैथी कक्षा तक और अंत में डाकेजनी की टोली में समाविष्ट होने की पांचवीं कक्षा में बढ़ोतरी मिलती है। कारागृह में जाना हो तो इन्हीं बच्चों को भेजा जाता है। महंत सामान्यतया अपने स्थान पर अडिग रहते हैं, न वे कभी किसी के झांसे में आते हैं। यह स्पष्ट निर्देश होता है कि इस विद्यापीठ में नए रिक्रूट की भरती अविरल रूप से होनी चाहिए।

चोरों के अड्डे यदि हिंदुओं के हैं तो मिलते हैं तो उनमें अनाथ, कंगले हिंदू बच्चे जिस तरह मिलते है,


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