उसी तरह कुछ मुसलमान क साथ खान-पान मत कर। मुसलमान के हिंदूकरण की कल्पना वह कभी नहीं कर सकता। अतः हिंदू महंतों के अड्डे पर मुसलमान बच्चे बरामद भी हुए तो वे चोर, पाजी, लफंगे बनेंगे, जेब काटेंगे; परंतु मुसलिम धर्म से च्युत होने का उन्हें भय नहीं होता। इसके विपरीत, उनके साथ कभी-कभार, लाचारी से ही क्यों न हो, खान-पान करते हुए हिंदू महंत ही मुसलमान बनकर पतित हो जाते हैं। परंतु मुसलमानी महंतों के अड्डे में अनाथ, कंगाल, आवारा
उसी तरह कुछ मुसलमान क साथ खान-पान मत कर। मुसलमान के हिंदूकरण की कल्पना वह कभी नहीं कर सकता। अतः हिंदू महंतों के अड्डे पर मुसलमान बच्चे बरामद भी हुए तो वे चोर, पाजी, लफंगे बनेंगे, जेब काटेंगे; परंतु मुसलिम धर्म से च्युत होने का उन्हें भय नहीं होता। इसके विपरीत, उनके साथ कभी-कभार, लाचारी से ही क्यों न हो, खान-पान करते हुए हिंदू महंत ही मुसलमान बनकर पतित हो जाते हैं। परंतु मुसलमानी महंतों के अड्डे में अनाथ, कंगाल, आवारा