हिंदू बालक जो मिलते हैं उनकी अवस्था उपरिनिर्दिष्ट घटना से सर्वथा विपरीत होती है। उन्हें चोरी करना सीखना पड़ता है, पाप करने पड़ते हैं, कारागृह में सड़ना पड़ता है और साथ ही अपने हिंदू धर्म से च्युत भी होना
पड़ता है, क्यांेकि चोरी-चकारी करते समय प्रसंगानुसार उनके खान-पान, शिखाकर्तन, दाढ़ी आदि सभी नाटक करने पड़ते हैं। परंतु इस प्रकार उन हिंदू बालकों को एक-दो बार अभक्ष्य करवाकर अथवा उसकी रोटी के टुकड़ों को स्पर्श करके अथवा मुसलमानी
हिंदू बालक जो मिलते हैं उनकी अवस्था उपरिनिर्दिष्ट घटना से सर्वथा विपरीत होती है। उन्हें चोरी करना सीखना पड़ता है, पाप करने पड़ते हैं, कारागृह में सड़ना पड़ता है और साथ ही अपने हिंदू धर्म से च्युत भी होना
पड़ता है, क्यांेकि चोरी-चकारी करते समय प्रसंगानुसार उनके खान-पान, शिखाकर्तन, दाढ़ी आदि सभी नाटक करने पड़ते हैं। परंतु इस प्रकार उन हिंदू बालकों को एक-दो बार अभक्ष्य करवाकर अथवा उसकी रोटी के टुकड़ों को स्पर्श करके अथवा मुसलमानी