के नए हिंदू युवकों पर दृष्टि रखते हैं; क्योंकि वहीं पर वे चोरी के प्रथम या आगे के पाठ पढ़कर मुसलमान बनते हैं और वही बच्चे उनके दुष्ट व्यवसाय के लिए उपयोगी होकर बंबई आादि महानगर स्थित अड्डों में समाविष्ट किए जाते हैं। मुसलमान बनाने के इस प्रयास को बंदीगृह में नौकरी करनेवाले मुसलमान सिपाही भी कभी-कभी हस्ते-पर-हस्ते सहायता देते हुए पाए जाते हैं। परंतु मुसलमान बंदियों में से जो वाॅर्डर, पेटी अफसर आदि बंदीवान अधिकारी नियुक्त किए जाते हैं,
के नए हिंदू युवकों पर दृष्टि रखते हैं; क्योंकि वहीं पर वे चोरी के प्रथम या आगे के पाठ पढ़कर मुसलमान बनते हैं और वही बच्चे उनके दुष्ट व्यवसाय के लिए उपयोगी होकर बंबई आादि महानगर स्थित अड्डों में समाविष्ट किए जाते हैं। मुसलमान बनाने के इस प्रयास को बंदीगृह में नौकरी करनेवाले मुसलमान सिपाही भी कभी-कभी हस्ते-पर-हस्ते सहायता देते हुए पाए जाते हैं। परंतु मुसलमान बंदियों में से जो वाॅर्डर, पेटी अफसर आदि बंदीवान अधिकारी नियुक्त किए जाते हैं,