करने लगे तो हमने देखा कि उन्हें इस बात से कुछ लेना-देना नहीं था। हर कोई कहता, ‘मुझे इससे क्या?’
मुसलमानों का विरोध
अज्ञानी हिंदुओं क बात छोड़िए, परंतु राजनीतिक बंदीवानों में भी इस मुसलमानीकरण में बाधा डालने का साहस कई लोगों में नहीं हो सका। एक तरह से वह क्षम्य भी था। उनकी सहनशीलता आखिर कितना तनाव सहेगी? देश में अथक परिश्रम करके भयंकर दंड भुगतते हुए वे कारागारों में सड़ रहे थे, और अब कारागृह में भी सभी से टक्कर लेते
करने लगे तो हमने देखा कि उन्हें इस बात से कुछ लेना-देना नहीं था। हर कोई कहता, ‘मुझे इससे क्या?’
मुसलमानों का विरोध
अज्ञानी हिंदुओं क बात छोड़िए, परंतु राजनीतिक बंदीवानों में भी इस मुसलमानीकरण में बाधा डालने का साहस कई लोगों में नहीं हो सका। एक तरह से वह क्षम्य भी था। उनकी सहनशीलता आखिर कितना तनाव सहेगी? देश में अथक परिश्रम करके भयंकर दंड भुगतते हुए वे कारागारों में सड़ रहे थे, और अब कारागृह में भी सभी से टक्कर लेते