मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

ही मुसलमान धर्म स्वीकारने का विचार कर रहे हैं। फिर अन्य हिंदुओं को उनकी आंखों के सामने भ्रष्ट किए जाते समय उसका प्रतिकार करने की बात किसलिए?

मुसलमान अधिकारियों को प्रसन्न करने और यह प्रतिपादित करने की कि अपनी भीरूता ही बुद्विमानी है, अगली सीढ़ी यह थी कि आगे जब मुसलमानी चंगुल से हिंदू लोगों को छुड़ाने के लिए झगड़े होते तब तब इस प्रवत्तिा के लोग झगड़नेवाले हिंदू लोगों को पागल कहते हुए मुसलमान जामदारों को प्रसन्न करते और हिंदुओं से कहते,


1074 of 2228

ही मुसलमान धर्म स्वीकारने का विचार कर रहे हैं। फिर अन्य हिंदुओं को उनकी आंखों के सामने भ्रष्ट किए जाते समय उसका प्रतिकार करने की बात किसलिए?

मुसलमान अधिकारियों को प्रसन्न करने और यह प्रतिपादित करने की कि अपनी भीरूता ही बुद्विमानी है, अगली सीढ़ी यह थी कि आगे जब मुसलमानी चंगुल से हिंदू लोगों को छुड़ाने के लिए झगड़े होते तब तब इस प्रवत्तिा के लोग झगड़नेवाले हिंदू लोगों को पागल कहते हुए मुसलमान जामदारों को प्रसन्न करते और हिंदुओं से कहते,


1074 of 2228