(चक्कर) देकर शेष आधा घेरा देने लायक शक्ति हाथों में नहीं होने से उसपर लटककर उसकी पूर्ति करनी पड़ती थी। इतनी शक्ति उस कोल्हू में पड़े नारियल पीसने को जुटानी पड़ती। इतने कठोर परिश्रम से अनजान और कोमल वय के थे, बीस की आयु के इधर-उधर के सुकुमार शिक्षित नवयुवक राजबंदी। सामान्यतः प्रातःकाल दस बजे तक इस तरह सतत चक्कर घुमाते-घुमाते सांस फूल जाती। किसी- किसी का ही नहीं, प्रायः सभी का सिर चकराने से बार-बार नीचे बैठना पड़ता। दस बजे
(चक्कर) देकर शेष आधा घेरा देने लायक शक्ति हाथों में नहीं होने से उसपर लटककर उसकी पूर्ति करनी पड़ती थी। इतनी शक्ति उस कोल्हू में पड़े नारियल पीसने को जुटानी पड़ती। इतने कठोर परिश्रम से अनजान और कोमल वय के थे, बीस की आयु के इधर-उधर के सुकुमार शिक्षित नवयुवक राजबंदी। सामान्यतः प्रातःकाल दस बजे तक इस तरह सतत चक्कर घुमाते-घुमाते सांस फूल जाती। किसी- किसी का ही नहीं, प्रायः सभी का सिर चकराने से बार-बार नीचे बैठना पड़ता। दस बजे