से नियामानुसार दो घंटे काम बंद रखा जाता। परंतु कोल्हू का काम ऐसा नहीं था, जिसमें अवरोध पड़ता। भोजन आते ही कमरा खोला जाता। बंदी के बाहर आकर दाल, भात, रोटी के साथ भीतर जाने के लिए मुड़ते ही दरवाजा पुनः बंद। यदि कोई हाथ धोकर पसीने से लथपथ शरीर साफ करने लगता तो उतना विलंब भी असहनीय होता। जमादार का अर्थात् बंदियों में बदमाश, जिसे किसी ने अधिकारी बनाया हुआ होता, मां-बहनों की गाली बकना निश्चित था। हाथ धोने के लिए पानी कहां से
से नियामानुसार दो घंटे काम बंद रखा जाता। परंतु कोल्हू का काम ऐसा नहीं था, जिसमें अवरोध पड़ता। भोजन आते ही कमरा खोला जाता। बंदी के बाहर आकर दाल, भात, रोटी के साथ भीतर जाने के लिए मुड़ते ही दरवाजा पुनः बंद। यदि कोई हाथ धोकर पसीने से लथपथ शरीर साफ करने लगता तो उतना विलंब भी असहनीय होता। जमादार का अर्थात् बंदियों में बदमाश, जिसे किसी ने अधिकारी बनाया हुआ होता, मां-बहनों की गाली बकना निश्चित था। हाथ धोने के लिए पानी कहां से