के पानी की जहां यह अवस्था हो वहां स्नान का नाम क्या लेना?
तेल पूरा करना पड़ेगा
स्नान की ही बात क्यों? भोजन की भी यही अवस्था थी। भोजन परोसकर एक बार दरवाजा बंद करते ही जमादार को यह चिंता नहीं होती कि बंदी खा रहे हैं या नहीं। वह सतत उस चाली की कोठरियों के सामने से चिल्लाते हुए चलता-‘अरे बैठो मत। शाम तक तेल पूरा करना होगा। नही ंतो पिटोगे, सजा होगी सो अलग।’ इस तरह उसके चीखते-चिल्लाते कइयों के गले से कौर नहीं उतरता, क्यांेकि
के पानी की जहां यह अवस्था हो वहां स्नान का नाम क्या लेना?
तेल पूरा करना पड़ेगा
स्नान की ही बात क्यों? भोजन की भी यही अवस्था थी। भोजन परोसकर एक बार दरवाजा बंद करते ही जमादार को यह चिंता नहीं होती कि बंदी खा रहे हैं या नहीं। वह सतत उस चाली की कोठरियों के सामने से चिल्लाते हुए चलता-‘अरे बैठो मत। शाम तक तेल पूरा करना होगा। नही ंतो पिटोगे, सजा होगी सो अलग।’ इस तरह उसके चीखते-चिल्लाते कइयों के गले से कौर नहीं उतरता, क्यांेकि