मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

पड़ता। अभ्यासी कोई चार बजे समाप्त करता। सर्वथा पक्का सौ में एकाध व्यक्ति ही सदैव पूरा काम अर्थात् तीस पौंड तेल निकाल पाता। शेष सभी आज नही ंतो कल इतना जी-तोड़ कष्ट उठाकर भी काम पूरा करने में असमर्थ रहते। उनमें से जो नौसिखिए, सीधे-सादे और सापेक्षतः सच्चे होते, हाय! हाय! उन्हीं पर जमादार वाॅर्डरों की मार पड़ती। भोजन न करते हुए काम में जुटने पर भी तेल का कोटा पूरा न होने पर थप्पड़-लात-घूंसों-डंडों की मार खाते, थके-मांदे बंदी


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पड़ता। अभ्यासी कोई चार बजे समाप्त करता। सर्वथा पक्का सौ में एकाध व्यक्ति ही सदैव पूरा काम अर्थात् तीस पौंड तेल निकाल पाता। शेष सभी आज नही ंतो कल इतना जी-तोड़ कष्ट उठाकर भी काम पूरा करने में असमर्थ रहते। उनमें से जो नौसिखिए, सीधे-सादे और सापेक्षतः सच्चे होते, हाय! हाय! उन्हीं पर जमादार वाॅर्डरों की मार पड़ती। भोजन न करते हुए काम में जुटने पर भी तेल का कोटा पूरा न होने पर थप्पड़-लात-घूंसों-डंडों की मार खाते, थके-मांदे बंदी


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