महाबदमाशों को भी बारी साहब सर्वथा छूट देते हों, ऐसा नहीं था। सीधे-सादे लोगों पर प्रथमतः आते-जाते मारपीट होती, क्यांेकि घोंघों को पैरों तले कुचल डालना वीर पुरूषों के लिए आसान काम होता है। इस प्रकार उन सीधे-सादे निर्बल निर्लज्जों की धुनाई होते देखकर उन बदमाशों के मन में भी, जिनका तेल का कोटा पूरा नहीं हुआ होता, यह भय उत्पन्न होना स्वाभाविक था कि उन्हांेने और तंग किया तो उन्हें भी यही प्रायश्चित्त करना होगा और उनमें कुछ
महाबदमाशों को भी बारी साहब सर्वथा छूट देते हों, ऐसा नहीं था। सीधे-सादे लोगों पर प्रथमतः आते-जाते मारपीट होती, क्यांेकि घोंघों को पैरों तले कुचल डालना वीर पुरूषों के लिए आसान काम होता है। इस प्रकार उन सीधे-सादे निर्बल निर्लज्जों की धुनाई होते देखकर उन बदमाशों के मन में भी, जिनका तेल का कोटा पूरा नहीं हुआ होता, यह भय उत्पन्न होना स्वाभाविक था कि उन्हांेने और तंग किया तो उन्हें भी यही प्रायश्चित्त करना होगा और उनमें कुछ