बजे से बिना आराम किए खड़े-खडे़ दोपहर ग्यारह बजे भोजन करते और शाम तक बिना रूके कोल्हू चला-चलाकर जो पस्त हो जाते थे, उनमें भी ऐसे दस-पांच बंदी ही होते जो तेल का कोटा पूरा करना असंभव ही होता। परंतु बारी साहब कुर्सी मंगवाकर उस चाली को ताला ठांेक देते और सभी बंदीगृहों का काम ठीक पांच-छह बजे बंद कराकर नियमानुसार सभी कारागृह बंद करने का प्रतिवृत्त (रिपोर्ट) सूचित करते, बस उसी चाली का काम ठोंककर चलवाते रहते। उस नियम को पैरों तले कुचलकर
बजे से बिना आराम किए खड़े-खडे़ दोपहर ग्यारह बजे भोजन करते और शाम तक बिना रूके कोल्हू चला-चलाकर जो पस्त हो जाते थे, उनमें भी ऐसे दस-पांच बंदी ही होते जो तेल का कोटा पूरा करना असंभव ही होता। परंतु बारी साहब कुर्सी मंगवाकर उस चाली को ताला ठांेक देते और सभी बंदीगृहों का काम ठीक पांच-छह बजे बंद कराकर नियमानुसार सभी कारागृह बंद करने का प्रतिवृत्त (रिपोर्ट) सूचित करते, बस उसी चाली का काम ठोंककर चलवाते रहते। उस नियम को पैरों तले कुचलकर