इस चाली में काम चालूू रखने की बात का भांडा फोड़ने का भला किसी सिपाही या नौकर में साहस था? बारी साहब सप्ताह के अंदर-अंदर कुछ-न-कुछ षड्यंत्र रचकर, उस पर लांछन लगाकर उसका सर्वनाश कर देते, इसका कोई नियम थोड़े ही था? तब रात सात-आठ-नौ बजे तक कोल्हू चलाए जाते। आते-जाते सिपाही-जमादार मारपीट कर रहे हैं, घंटों के पीछे घंटे बज रहे है, पूरी बंदीशाला गहरी नींद में है किंतू कोल्हू की इमारत कर्रर करती काम कर रही है,बारी चाली के आगे
इस चाली में काम चालूू रखने की बात का भांडा फोड़ने का भला किसी सिपाही या नौकर में साहस था? बारी साहब सप्ताह के अंदर-अंदर कुछ-न-कुछ षड्यंत्र रचकर, उस पर लांछन लगाकर उसका सर्वनाश कर देते, इसका कोई नियम थोड़े ही था? तब रात सात-आठ-नौ बजे तक कोल्हू चलाए जाते। आते-जाते सिपाही-जमादार मारपीट कर रहे हैं, घंटों के पीछे घंटे बज रहे है, पूरी बंदीशाला गहरी नींद में है किंतू कोल्हू की इमारत कर्रर करती काम कर रही है,बारी चाली के आगे