इससे तो मृत्यु भली। बीमारी तब तक ढोंग की सूची में समाविष्ट होती थी जब तक वह गंभीर स्वरूप धारण नहीं करती। उसमें भी यदि ज्वर हो तो 101 ॰ के ऊपर चढ़ने पर ही उसे ज्वर समझा जाता, तब भी राजबंदी को रूग्णालय में नहीं अपितु कोठरी में ही बंद किया जाता। साधारण चोरी, आगजनी, डकैती, गर्दन काटना आदि पोर्ट ब्लेअर के नीतिशास्त्र के अक्षम्य अपराध हैं, ऐसे अपराध करनेवालों को रूग्णालय में मात्र रोगी कहते हैं। सोने के लिए खटिया दी जाती। परंतु ज्वर अथवा दस्त,
इससे तो मृत्यु भली। बीमारी तब तक ढोंग की सूची में समाविष्ट होती थी जब तक वह गंभीर स्वरूप धारण नहीं करती। उसमें भी यदि ज्वर हो तो 101 ॰ के ऊपर चढ़ने पर ही उसे ज्वर समझा जाता, तब भी राजबंदी को रूग्णालय में नहीं अपितु कोठरी में ही बंद किया जाता। साधारण चोरी, आगजनी, डकैती, गर्दन काटना आदि पोर्ट ब्लेअर के नीतिशास्त्र के अक्षम्य अपराध हैं, ऐसे अपराध करनेवालों को रूग्णालय में मात्र रोगी कहते हैं। सोने के लिए खटिया दी जाती। परंतु ज्वर अथवा दस्त,