उलटियां आदि प्रत्यक्ष रोग कहते हैं। सोने के लिए खटिया दी जाती। परंतु ज्वर अथवा दस्त, उलटियां आदि प्रत्यक्ष रोग नहीं होते। सरदर्द, ह्नदय विकृति, जी घबराना आदि अप्रत्यक्ष रोगों ने जिसे जर्जर किया है, उनकी दशा पूछना तो दूर, उनके रोग का निदान ढोंग अथवा कामचोरी जैसे रोग से ग्रस्त होने में किया जाता था, साथ ही दंड भी दिया जाता। हां, यह बात असत्य नहीं कि दंडितों में उनके पास, जिन्हें गुरूकंटाल कहा जाता, आवश्यकतानुसार तेज ज्वर,
उलटियां आदि प्रत्यक्ष रोग कहते हैं। सोने के लिए खटिया दी जाती। परंतु ज्वर अथवा दस्त, उलटियां आदि प्रत्यक्ष रोग नहीं होते। सरदर्द, ह्नदय विकृति, जी घबराना आदि अप्रत्यक्ष रोगों ने जिसे जर्जर किया है, उनकी दशा पूछना तो दूर, उनके रोग का निदान ढोंग अथवा कामचोरी जैसे रोग से ग्रस्त होने में किया जाता था, साथ ही दंड भी दिया जाता। हां, यह बात असत्य नहीं कि दंडितों में उनके पास, जिन्हें गुरूकंटाल कहा जाता, आवश्यकतानुसार तेज ज्वर,