दस्त अथवा खून की उलटियां होने की औषधियां तथा उपाय होते। परंतु यह बात भी झूठ नहीं है कि इस तरह की दवाइयों के बदले 103-104॰ तक ज्वर से तपना स्वीकार है। तीव्र पेटदर्द होकर खून के दस-दस दस्त होना भी स्वीकार है, परंतु इस कोल्हू की यातना से कुछ दिनों के लिए मुक्ति मिले। इस तरह जिस कोल्हू के कष्ट असहनीय थे- महान् बदमाशों को भी जो असहनीय होते- उसी कोल्हू में उन राजबंदियों को जोता जाता जो अपने जीवन में पहली बार बंदीगृह का मुंह
दस्त अथवा खून की उलटियां होने की औषधियां तथा उपाय होते। परंतु यह बात भी झूठ नहीं है कि इस तरह की दवाइयों के बदले 103-104॰ तक ज्वर से तपना स्वीकार है। तीव्र पेटदर्द होकर खून के दस-दस दस्त होना भी स्वीकार है, परंतु इस कोल्हू की यातना से कुछ दिनों के लिए मुक्ति मिले। इस तरह जिस कोल्हू के कष्ट असहनीय थे- महान् बदमाशों को भी जो असहनीय होते- उसी कोल्हू में उन राजबंदियों को जोता जाता जो अपने जीवन में पहली बार बंदीगृह का मुंह