देता। यदि बंदीवान लातों-घूंसों से मारने योग्य हो तो उसकी धुनाई जमादार स्वयं करता, यदि दंडित गुस्सैल है तो वह उसे बारी साहब के सामने खड़ा करता और उस पर अभियोग लगाया जाता। किसलिए? तो ‘कोठरी में गंदगी फेलाने’ के अपराध में। एक तो यह बंड देकर कि ‘आरोपी अपने हाथों से मल साफ करे’ उससे वह काम करवाया जाता और तीन-चार दिन उसे अड़गोड़े में (यत्रंणा देने का यंत्र, जिसमंे पुराने जमाने में अपराधियों के हाथ-पांव कस दिए जाते) खड़े रहने का दंड दिया जाता।
देता। यदि बंदीवान लातों-घूंसों से मारने योग्य हो तो उसकी धुनाई जमादार स्वयं करता, यदि दंडित गुस्सैल है तो वह उसे बारी साहब के सामने खड़ा करता और उस पर अभियोग लगाया जाता। किसलिए? तो ‘कोठरी में गंदगी फेलाने’ के अपराध में। एक तो यह बंड देकर कि ‘आरोपी अपने हाथों से मल साफ करे’ उससे वह काम करवाया जाता और तीन-चार दिन उसे अड़गोड़े में (यत्रंणा देने का यंत्र, जिसमंे पुराने जमाने में अपराधियों के हाथ-पांव कस दिए जाते) खड़े रहने का दंड दिया जाता।