मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

चाहे वे काम करें या न करें। अतः न केवल रात में, बल्कि दिन में भी उन पर मल-मूत्र विसर्जन की रोक लगाई जाती। निरूपाय हो तब कोठरी अथवा इमारत में चोरी-छिपे भूमि अथवा भीत पर लघुशंका करनी पड़ती। अन्य निर्लज्ज बंदियों को इसका कोई सुख-दुःख नहीं था। वे तो लोगों के सामने भी हंसते-हंसते सब कुछ कर लेते। परंतु राजबंदियों को, जो सभ्य-शिष्ट जनों में पले-बढ़े थे-इस तरह करना जब अनिवार्य होता तब उन्हें तीव्र नैतिक वेदना भुगतनी पड़ती। देहधर्म


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चाहे वे काम करें या न करें। अतः न केवल रात में, बल्कि दिन में भी उन पर मल-मूत्र विसर्जन की रोक लगाई जाती। निरूपाय हो तब कोठरी अथवा इमारत में चोरी-छिपे भूमि अथवा भीत पर लघुशंका करनी पड़ती। अन्य निर्लज्ज बंदियों को इसका कोई सुख-दुःख नहीं था। वे तो लोगों के सामने भी हंसते-हंसते सब कुछ कर लेते। परंतु राजबंदियों को, जो सभ्य-शिष्ट जनों में पले-बढ़े थे-इस तरह करना जब अनिवार्य होता तब उन्हें तीव्र नैतिक वेदना भुगतनी पड़ती। देहधर्म


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