की नैतिक आवश्यकता भी उस बंदीगृह में सरकारी अनुशासन के विरूद्व एक घोर अपराध समझा जाता। अच्छा भोजन, अच्छा वस्त्र-परिधान तो दूर, असमय शौच लगने अथवा पेट फूलने पर अवरोध असहनीय होने से पूर्व ही लघुशंका करना भी विलासप्रियता समझकर उस कठोर कारागृह में दंडनीय माना जाता।
अंदमानीय नीतिशस्त्र
इस प्रकार के अनुशासन के कारण मेरे ज्येष्ठ बंधु को ‘छिलका-नारियल की जटाएं’ कुटने का, जैसाकि पीछे वर्णन किया है, काम दिया गया था, जिससे उन्हें आंव
की नैतिक आवश्यकता भी उस बंदीगृह में सरकारी अनुशासन के विरूद्व एक घोर अपराध समझा जाता। अच्छा भोजन, अच्छा वस्त्र-परिधान तो दूर, असमय शौच लगने अथवा पेट फूलने पर अवरोध असहनीय होने से पूर्व ही लघुशंका करना भी विलासप्रियता समझकर उस कठोर कारागृह में दंडनीय माना जाता।
अंदमानीय नीतिशस्त्र
इस प्रकार के अनुशासन के कारण मेरे ज्येष्ठ बंधु को ‘छिलका-नारियल की जटाएं’ कुटने का, जैसाकि पीछे वर्णन किया है, काम दिया गया था, जिससे उन्हें आंव