मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas




का विकार हो गया। उनके पेट में बहुत पीड़ा होती, भोजन करते-करते जी मिचलाता। परंतु एक बार कोठरी बंद करने पर संध्या समय ही खुलती। अन्य बंदियों को आंव आदि विकार होने पर उन्हें रूग्णालय भेज दिया जाता। इस कारण वे मल-मूत्र यथासमय करने का सुख अनुभव कर सकते थे। परंतु राजबंदी बीमारी में भी कोठरी में ही बंद पड़े रहते। उन्हें रूग्णालय में नहीं भेजा जाता, जब तक बिलकुल खटिया नहीं पकड़ी तब तक; और कोठरी में भी बीमारी में जो एक मटका मिलता,


458 of 2228




का विकार हो गया। उनके पेट में बहुत पीड़ा होती, भोजन करते-करते जी मिचलाता। परंतु एक बार कोठरी बंद करने पर संध्या समय ही खुलती। अन्य बंदियों को आंव आदि विकार होने पर उन्हें रूग्णालय भेज दिया जाता। इस कारण वे मल-मूत्र यथासमय करने का सुख अनुभव कर सकते थे। परंतु राजबंदी बीमारी में भी कोठरी में ही बंद पड़े रहते। उन्हें रूग्णालय में नहीं भेजा जाता, जब तक बिलकुल खटिया नहीं पकड़ी तब तक; और कोठरी में भी बीमारी में जो एक मटका मिलता,


458 of 2228