न कि उनपर। वाॅर्डर और पेटी अफसर गालियां बकते हुए उनके पीछे पड़ते, ‘चलो-चलो, काम तुम्हारा ं ं ं ंकरेगा इत्यादि-इत्यादि। अंत में थककार वे हवलदार को बुलाते। हवलदार भी समझाने का प्रयास करता। ये महाशय बड़ी शांति से उसको ही समझाते, ‘‘देखो भाई, प्रत्येक ग्रास ठीक तरह से चबाकर निगलने से ही सही-सही पचता है। हड़बड़ी में खाने से पेट खराब होता है।’’ हवलदार हारकर बारी को ले आया। जेल में यह समाचार आते ही कि ‘बारी आ रहा है’ ऐसा हड़कंप मचा
न कि उनपर। वाॅर्डर और पेटी अफसर गालियां बकते हुए उनके पीछे पड़ते, ‘चलो-चलो, काम तुम्हारा ं ं ं ंकरेगा इत्यादि-इत्यादि। अंत में थककार वे हवलदार को बुलाते। हवलदार भी समझाने का प्रयास करता। ये महाशय बड़ी शांति से उसको ही समझाते, ‘‘देखो भाई, प्रत्येक ग्रास ठीक तरह से चबाकर निगलने से ही सही-सही पचता है। हड़बड़ी में खाने से पेट खराब होता है।’’ हवलदार हारकर बारी को ले आया। जेल में यह समाचार आते ही कि ‘बारी आ रहा है’ ऐसा हड़कंप मचा