मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

दूसरा कंबल ओढ़े खर्राटे भर रहे हैं। चिढ़कर गाली बकता पेटी अफसर दहाड़ा, ‘‘ ऐ शैतान! अबे तुझे हो क्या गया। अब तो उठ।’’ श्रीमान ने आंखें खोली। हाथ से धीरे से संकेत किया, ‘शोर मत करो।’ फिर मुंह से, ‘‘जमादार, भोजन से निपटते ही कोल्हू चलाने लगूं तो सारे खाए हुए अन्न का पाचन नहीं होगा। वैद्यक शास्त्र का एक और प्रमेह है कि भोजन के पश्चात् तनिक बाईं करवट से विश्राम करें।

मेरी नानी भी यही कहा करती थीं।’’ सभी बंद हंसते-हंसते लोटपोट


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दूसरा कंबल ओढ़े खर्राटे भर रहे हैं। चिढ़कर गाली बकता पेटी अफसर दहाड़ा, ‘‘ ऐ शैतान! अबे तुझे हो क्या गया। अब तो उठ।’’ श्रीमान ने आंखें खोली। हाथ से धीरे से संकेत किया, ‘शोर मत करो।’ फिर मुंह से, ‘‘जमादार, भोजन से निपटते ही कोल्हू चलाने लगूं तो सारे खाए हुए अन्न का पाचन नहीं होगा। वैद्यक शास्त्र का एक और प्रमेह है कि भोजन के पश्चात् तनिक बाईं करवट से विश्राम करें।

मेरी नानी भी यही कहा करती थीं।’’ सभी बंद हंसते-हंसते लोटपोट


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