स्नायुओं में सूजन आने से उनमें पीड़ा होने लगी, हथेलियों पर बड़े-बड़े फोड़े उभरने लगे और ऐसे ही कूटते रहने के कारण खून बहने लगा। मैंने सुपरिंटेंडेंट को हाथ दिखाकर कहा, ‘‘क्या काम में परिवर्तन नहीं हो सकता? कम-से-कम कुछ दिनों के लिए तो काम बंद हो जाए।’’ उन्होंने बस एक ही वाक्य में उत्तर दिया, ‘‘सभी की यही हालत होती है। आपको तो बस एक ही पौंड छिलका दिया। यही सरकारी कृपा समझिए कि दो पौंड नहीं दिया। इतना कहकर वे चलते बने। अर्थात्
स्नायुओं में सूजन आने से उनमें पीड़ा होने लगी, हथेलियों पर बड़े-बड़े फोड़े उभरने लगे और ऐसे ही कूटते रहने के कारण खून बहने लगा। मैंने सुपरिंटेंडेंट को हाथ दिखाकर कहा, ‘‘क्या काम में परिवर्तन नहीं हो सकता? कम-से-कम कुछ दिनों के लिए तो काम बंद हो जाए।’’ उन्होंने बस एक ही वाक्य में उत्तर दिया, ‘‘सभी की यही हालत होती है। आपको तो बस एक ही पौंड छिलका दिया। यही सरकारी कृपा समझिए कि दो पौंड नहीं दिया। इतना कहकर वे चलते बने। अर्थात्