उसी अवस्था में छिलका कूटना पड़ा। कूटी हुई तथा बंधी हुई जटाओं की गड्डियों पर कई बार लहू की बूंदंे टपकती। परंतु यह देखने की धांधली में कि वह पौंड भर है या नहीं, बारी साहब को यह देखने की फुरसत ही कहां थी कि वे गड्डियां कूटने के लहू सने हाथ देखते।
साला लोग! बेंत लगावेंगे
तथापि नित्य ही शाम को आकर बारी साहब मुझसे दस-पांच मिनट अंग्रेजी में वार्त्तालाप किए बिना नहीं रहते। शीर्घ ही उनकी बातों मंे वहां के राजबंदियों के व्यवहार
उसी अवस्था में छिलका कूटना पड़ा। कूटी हुई तथा बंधी हुई जटाओं की गड्डियों पर कई बार लहू की बूंदंे टपकती। परंतु यह देखने की धांधली में कि वह पौंड भर है या नहीं, बारी साहब को यह देखने की फुरसत ही कहां थी कि वे गड्डियां कूटने के लहू सने हाथ देखते।
साला लोग! बेंत लगावेंगे
तथापि नित्य ही शाम को आकर बारी साहब मुझसे दस-पांच मिनट अंग्रेजी में वार्त्तालाप किए बिना नहीं रहते। शीर्घ ही उनकी बातों मंे वहां के राजबंदियों के व्यवहार