वह मुझे यह स्पष्ट सुनाना कि मेरे जैसे शिक्षित एंव ख्यातनाम व्यक्ति को उन मूर्ख, गंवार तथा अशिष्ट लोगों के जाल में नहीं फंसना चाहिए। इसी में मेरा कल्याण है। इस तरह के संवाद में, जो दीर्घ काल तक जारी रहा था, मैंने यथासंभव मुंह बंद रखा। परंतु कभी-कभी अपने बांधवों की बिना किसी कृपा प्राप्त करना, मुंह देखी करके हां में हां मिलाना मेरे लिए असहनीय होता और मात्र मौन रखने पर संतुष्ट न होकर बारी पूछता रहता, ‘आपकी क्या राय है? बताइए,
वह मुझे यह स्पष्ट सुनाना कि मेरे जैसे शिक्षित एंव ख्यातनाम व्यक्ति को उन मूर्ख, गंवार तथा अशिष्ट लोगों के जाल में नहीं फंसना चाहिए। इसी में मेरा कल्याण है। इस तरह के संवाद में, जो दीर्घ काल तक जारी रहा था, मैंने यथासंभव मुंह बंद रखा। परंतु कभी-कभी अपने बांधवों की बिना किसी कृपा प्राप्त करना, मुंह देखी करके हां में हां मिलाना मेरे लिए असहनीय होता और मात्र मौन रखने पर संतुष्ट न होकर बारी पूछता रहता, ‘आपकी क्या राय है? बताइए,