बताइए न!’ एक ही उदाहरण देना हो तो इतना कहकर कि पीछे जिन श्रीमानजी की मैंने जानकारी दी, उनका हड़ताल-कालीन मुंहतोड़ आचरण अशिष्टता थी, बारी साहब बार-बार मुझे अनुरोधपूर्वक यही जताने लगे कि वह पागल हो गया था, वह हीनकुलीन मनुष्य है। इतना ही नहीं, लालच दिखाकर मुझसे कहने लगे, ‘‘आपके जैसे पढ़े-लिखे शिक्षित व्यक्ति की इस बारे में राय सुनने की मेरी इच्छा है। बताइए, पागल हुह बिना भला कोई इस तरह का आचरण कर सकता है?’’
बारी रचित नाटक
बताइए न!’ एक ही उदाहरण देना हो तो इतना कहकर कि पीछे जिन श्रीमानजी की मैंने जानकारी दी, उनका हड़ताल-कालीन मुंहतोड़ आचरण अशिष्टता थी, बारी साहब बार-बार मुझे अनुरोधपूर्वक यही जताने लगे कि वह पागल हो गया था, वह हीनकुलीन मनुष्य है। इतना ही नहीं, लालच दिखाकर मुझसे कहने लगे, ‘‘आपके जैसे पढ़े-लिखे शिक्षित व्यक्ति की इस बारे में राय सुनने की मेरी इच्छा है। बताइए, पागल हुह बिना भला कोई इस तरह का आचरण कर सकता है?’’
बारी रचित नाटक