तब सबकुछ असहनीय मानते हुए मैंने साफ कर दिया, ‘‘यद्यपि मुझसे आपके वर्णित राजबंदियों में से किसी का परिचय नहीं हुआ है, तथापि आपके बताए हुए वृत्तांत से भी उसमें मुझे रत्ती भर मतिभ्रष्टता अथवा असभ्यता नहीं दिखती। कष्ट असहनीय होने पर अथवा अधिकारियों की नियम विरूद्व यंत्रनाओं पर राजबंदी ही नहीं, अन्य बंदियों को भी हड़ताल द्वारा उनका प्रतिषेध करने के अतिरिक्त सहजतापूर्वक अन्य कौन सा मार्ग मिलेगा? आप चाहे कुछ भी कहो, ये श्रीमान
तब सबकुछ असहनीय मानते हुए मैंने साफ कर दिया, ‘‘यद्यपि मुझसे आपके वर्णित राजबंदियों में से किसी का परिचय नहीं हुआ है, तथापि आपके बताए हुए वृत्तांत से भी उसमें मुझे रत्ती भर मतिभ्रष्टता अथवा असभ्यता नहीं दिखती। कष्ट असहनीय होने पर अथवा अधिकारियों की नियम विरूद्व यंत्रनाओं पर राजबंदी ही नहीं, अन्य बंदियों को भी हड़ताल द्वारा उनका प्रतिषेध करने के अतिरिक्त सहजतापूर्वक अन्य कौन सा मार्ग मिलेगा? आप चाहे कुछ भी कहो, ये श्रीमान