अच्छे-खासे कुलीन प्रतीत हो रहे हैं। वे कोई कांइयां या कलम घिसनेवाले क्लर्क (रोग और क्लाॅर्क) बिलकुल नहीं हैं। मेरा उत्तर सुनकर बारी साहब लाल-पीले हो गए। परंतु जैसे-तैसे उस दिन का भाषण समाप्त करके मुझे प्रभावित करने के लिए उन्होंने दूसरे दिन एक दूसरा ही नाटक करवाया। जिन राजबंदियों को बाहर काम पर भेजा जाता, वे लगभग ग्यारह बजे भोजन के लिए फिर बंदीगृह में आए हुए थे। उन्हें भोजन के लिए वहीं बुलाया गया जहां मैं भोजन कर रहा
अच्छे-खासे कुलीन प्रतीत हो रहे हैं। वे कोई कांइयां या कलम घिसनेवाले क्लर्क (रोग और क्लाॅर्क) बिलकुल नहीं हैं। मेरा उत्तर सुनकर बारी साहब लाल-पीले हो गए। परंतु जैसे-तैसे उस दिन का भाषण समाप्त करके मुझे प्रभावित करने के लिए उन्होंने दूसरे दिन एक दूसरा ही नाटक करवाया। जिन राजबंदियों को बाहर काम पर भेजा जाता, वे लगभग ग्यारह बजे भोजन के लिए फिर बंदीगृह में आए हुए थे। उन्हें भोजन के लिए वहीं बुलाया गया जहां मैं भोजन कर रहा