उलाहने उससे भी व्यर्थ सिद्व होेंगे। यह जानते हुए भी कि उनसे संभाषण करने से मुझे दंड मिलेगा, उन तटस्थ राजबंदियों से प्रथम बार मैंने प्रत्यक्ष भेंट की थी, और मैंने आगे बढ़कर उनसे उनके नाम पूछे। उनके उतरे हुए चेहरे देखकर मैंने कहा, ‘‘बंधु, आप मन में इसलिए संकोच मत करना और न ही अपना धीरज खो देना कि मेरे सामने बंदीपाल ने आपके लिए अश्लील भाषा का प्रयोग किया है। आज वह आपको कंगले, ओछे कह रहे हैं, कल मुझे भी कहंेगे। यह
आपका अपमान नहीं है,
उलाहने उससे भी व्यर्थ सिद्व होेंगे। यह जानते हुए भी कि उनसे संभाषण करने से मुझे दंड मिलेगा, उन तटस्थ राजबंदियों से प्रथम बार मैंने प्रत्यक्ष भेंट की थी, और मैंने आगे बढ़कर उनसे उनके नाम पूछे। उनके उतरे हुए चेहरे देखकर मैंने कहा, ‘‘बंधु, आप मन में इसलिए संकोच मत करना और न ही अपना धीरज खो देना कि मेरे सामने बंदीपाल ने आपके लिए अश्लील भाषा का प्रयोग किया है। आज वह आपको कंगले, ओछे कह रहे हैं, कल मुझे भी कहंेगे। यह
आपका अपमान नहीं है,