जो आपको इस तरह के दुःशब्द कहता है, वह अपने आपका ही अपमान करवाता है। आज हम अवश हैं। आज जगत् में हमारा अपमान हो रहा है, परंतु एक दिन कदाचित् ऐसा ही आएगा कि अंदमान के इस कारागार में राजबंदियों के पुतले खड़े होंगे और हजारों लोग इसे तीर्थ क्षेत्र मानकर इसकी यात्रा करेंगे कि यहां पर हिंदुस्थान के राजबंदी रहते थे।¹
उन कष्ट पीड़ित संत्रस्त बंधुओं में से किसी के भी पल्ले मेरे इस भाषण का पूरा अर्थ नहीं पड़ा। कम-से-कम इन विचारों
जो आपको इस तरह के दुःशब्द कहता है, वह अपने आपका ही अपमान करवाता है। आज हम अवश हैं। आज जगत् में हमारा अपमान हो रहा है, परंतु एक दिन कदाचित् ऐसा ही आएगा कि अंदमान के इस कारागार में राजबंदियों के पुतले खड़े होंगे और हजारों लोग इसे तीर्थ क्षेत्र मानकर इसकी यात्रा करेंगे कि यहां पर हिंदुस्थान के राजबंदी रहते थे।¹
उन कष्ट पीड़ित संत्रस्त बंधुओं में से किसी के भी पल्ले मेरे इस भाषण का पूरा अर्थ नहीं पड़ा। कम-से-कम इन विचारों