को प्रदर्शित करते समय मेरे अपने मन में जिस तेज का संचार हुआ तथा निराशा खत्म होती हुई लगी। वैसे भाव उनकी मुद्रा से प्रकट होते हुए दिखाई नहीं दिए। केवल एक जन ने तनिक चैंककर कहा, ‘‘क्या आप सत्य ही ऐसा सोचते हैं?’’ मैंने कहा, ‘‘कदाचित् ऐसा होगा भी। कम-से-कम होना चाहिए।’’ इतने में पेटी अफसर तथा वाॅर्डर चिल्लाते हुए आए और ‘आठ बाबू, तुम्हें क्या हो गया है। आपको इनसे बात करते हुए बारी ने देख लिया तो वह हमारी जान ले लेगा। चलो,
को प्रदर्शित करते समय मेरे अपने मन में जिस तेज का संचार हुआ तथा निराशा खत्म होती हुई लगी। वैसे भाव उनकी मुद्रा से प्रकट होते हुए दिखाई नहीं दिए। केवल एक जन ने तनिक चैंककर कहा, ‘‘क्या आप सत्य ही ऐसा सोचते हैं?’’ मैंने कहा, ‘‘कदाचित् ऐसा होगा भी। कम-से-कम होना चाहिए।’’ इतने में पेटी अफसर तथा वाॅर्डर चिल्लाते हुए आए और ‘आठ बाबू, तुम्हें क्या हो गया है। आपको इनसे बात करते हुए बारी ने देख लिया तो वह हमारी जान ले लेगा। चलो,