भाई साहब का सिर पीड़ा के मारे फटा जा रहा है। तब सुपरिंटेंडेंट से पूछा, ‘क्या यह सत्य है? तो फिर उन्हें रूग्णालय क्यों नहीं ले जाते? क्यों कोठरी में बंद रखते हो?’ उत्तर मिला, ‘आप अपने बारे में सोचिए, अन्य बंदियों के बारे में आप पूछताछ नहीं कर सकते।’ ऐसा कहकर उलटे मेरी चाली के जमादार को वह वैसे ही गालियां बकने लगा, ‘‘यह समाचार इस बंदी को कैसे ज्ञात हुआ? साला, तुम बंदोबस्त नहीं रखता। बताओ, किसने उसे यह बात बताई?’’ मैं ऐसी
भाई साहब का सिर पीड़ा के मारे फटा जा रहा है। तब सुपरिंटेंडेंट से पूछा, ‘क्या यह सत्य है? तो फिर उन्हें रूग्णालय क्यों नहीं ले जाते? क्यों कोठरी में बंद रखते हो?’ उत्तर मिला, ‘आप अपने बारे में सोचिए, अन्य बंदियों के बारे में आप पूछताछ नहीं कर सकते।’ ऐसा कहकर उलटे मेरी चाली के जमादार को वह वैसे ही गालियां बकने लगा, ‘‘यह समाचार इस बंदी को कैसे ज्ञात हुआ? साला, तुम बंदोबस्त नहीं रखता। बताओ, किसने उसे यह बात बताई?’’ मैं ऐसी