पूंछ से क्या डरना? और अपने अग्रज के पावन दर्शन के पुण्य से इसलिए कतराना कि नेत्र जल की चार बूंदें अधिक झरेंगी, यह भीरूता होगी। उस अवस्था में उन पवित्र आसुंओ में मंगल-स्नान होना जन्म-जन्मांतर के पुण्य का ही फल होता है।
आखिर यह देखकर कि इस समय उनसे भंेट होना संभव है, मैंने एक वाॅर्डर की सहायता से उसका प्रबंध करने का निश्चय किया। शाम को भी सभी बंदियों को एक साथ नहीं छोड़ा जाता था। परंतु कभी-कभी एक विभाग के बंदियों को
पूंछ से क्या डरना? और अपने अग्रज के पावन दर्शन के पुण्य से इसलिए कतराना कि नेत्र जल की चार बूंदें अधिक झरेंगी, यह भीरूता होगी। उस अवस्था में उन पवित्र आसुंओ में मंगल-स्नान होना जन्म-जन्मांतर के पुण्य का ही फल होता है।
आखिर यह देखकर कि इस समय उनसे भंेट होना संभव है, मैंने एक वाॅर्डर की सहायता से उसका प्रबंध करने का निश्चय किया। शाम को भी सभी बंदियों को एक साथ नहीं छोड़ा जाता था। परंतु कभी-कभी एक विभाग के बंदियों को