चिट्ठी भी मेरे बंधु की ओर से मुझे भेजी गई-‘तू बाहर का कार्य सफल करेगा ही, प्रिय हिंदुस्थान का ं ं ! बहुत विश्वास था मुझे। इस विश्वास के कारण मुझे कालेपानी का यह जो दंड मिला, उसका कुछ भी बुरा नहीं लगता। मन इस संकट को तुच्छ मानता था, क्यांेकि जिस कार्य में यह बलिदान मैं कर रहा हूं वह ं ं ं ं(करने) तू बाहर है ही। यह कल्पना मुझे धीरज बंधाती थी, कष्टों की सफलता का आभास दिलाती थी। परंतु पेरिस में रहते हुए भी तुम अब इनके हाथ
चिट्ठी भी मेरे बंधु की ओर से मुझे भेजी गई-‘तू बाहर का कार्य सफल करेगा ही, प्रिय हिंदुस्थान का ं ं ! बहुत विश्वास था मुझे। इस विश्वास के कारण मुझे कालेपानी का यह जो दंड मिला, उसका कुछ भी बुरा नहीं लगता। मन इस संकट को तुच्छ मानता था, क्यांेकि जिस कार्य में यह बलिदान मैं कर रहा हूं वह ं ं ं ं(करने) तू बाहर है ही। यह कल्पना मुझे धीरज बंधाती थी, कष्टों की सफलता का आभास दिलाती थी। परंतु पेरिस में रहते हुए भी तुम अब इनके हाथ