मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

और करूणास्पद अवस्था में वास्तविक रूप में चल रहे हैं। इन संकटों को सहना और इस तरह कारागार में सड़ते, सबसे अज्ञात रहते जिनके लिए इतने कष्ट झेले, उनकी भी गालियां खाते-खाते इस तरह मरना, यही अब हमारे जीवन का ध्येय है। यह भी उतना ही महान् है जितना बाहर रहकर कीर्ति यश और दुंदभि की ताल पर लड़ना। क्योंकि अंतिम विजय के लिए वह ज्ञात संघर्ष और


दुंदुभि का वह निनाद जितना आवश्यक होता है उतना ही सुरंग का यह अश्रुत कराहना और अज्ञात प्राण भी होता है।


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और करूणास्पद अवस्था में वास्तविक रूप में चल रहे हैं। इन संकटों को सहना और इस तरह कारागार में सड़ते, सबसे अज्ञात रहते जिनके लिए इतने कष्ट झेले, उनकी भी गालियां खाते-खाते इस तरह मरना, यही अब हमारे जीवन का ध्येय है। यह भी उतना ही महान् है जितना बाहर रहकर कीर्ति यश और दुंदभि की ताल पर लड़ना। क्योंकि अंतिम विजय के लिए वह ज्ञात संघर्ष और


दुंदुभि का वह निनाद जितना आवश्यक होता है उतना ही सुरंग का यह अश्रुत कराहना और अज्ञात प्राण भी होता है।


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