धीरज भी पुनः निश्चल होकर रोम-रोम में उत्साह का संचार करने लगा।
प्रकरण-11
कोल्हू का बैल
मैंने लगभग एक महीना छिलका कूटने का काम किया। सभी लोगों को आश्चर्य हो रहा था कि मुझ कोल्हू कैसे नहीं दिया गया। इस पर कुछ आशावादियों ने कहा,‘‘नहीं जी, बैरिस्टर बाबू को किस मुंह से कोल्हू का काम देंगे?’’ मैं उनसे कहता,‘‘उसी मुंह से जिससे बैरिस्टर बाबू को कालेपानी भेजकर, लंगोटी महनाकर छिलका कुटवाया।’’ आखिर एक दिन सुपरिंटेंडेंट ने आकर मुझसे कहा,
धीरज भी पुनः निश्चल होकर रोम-रोम में उत्साह का संचार करने लगा।
प्रकरण-11
कोल्हू का बैल
मैंने लगभग एक महीना छिलका कूटने का काम किया। सभी लोगों को आश्चर्य हो रहा था कि मुझ कोल्हू कैसे नहीं दिया गया। इस पर कुछ आशावादियों ने कहा,‘‘नहीं जी, बैरिस्टर बाबू को किस मुंह से कोल्हू का काम देंगे?’’ मैं उनसे कहता,‘‘उसी मुंह से जिससे बैरिस्टर बाबू को कालेपानी भेजकर, लंगोटी महनाकर छिलका कुटवाया।’’ आखिर एक दिन सुपरिंटेंडेंट ने आकर मुझसे कहा,