‘‘कल से आपको कोल्हू पर जाना है। छिलका¹ कूट-कूटकर अब आपके हाथ कठोर बन गए होंगे। अब और अधिक कठोर काम करने में कोई आपत्तिा नहीं होगी।’’ बारी साहब ने हंसते हुए कहा, ‘‘अब आप ऊपरी कक्षा में प्रवेश कर रहे हैं।’’ उस दिन शाम के समय बारी साहब ने मुझे कचहरी में बुलाया। मुझसे हुए संभाषण से उन्हें ज्ञात हो चुका था कि राजबंदियों की हड़ताल से मेरी सहानुभूति थी और हड़ताल तथा निर्भीक आचरण की उद्दंड, अशिष्ट तथा मूर्खता के प्रतीक-रूप में
‘‘कल से आपको कोल्हू पर जाना है। छिलका¹ कूट-कूटकर अब आपके हाथ कठोर बन गए होंगे। अब और अधिक कठोर काम करने में कोई आपत्तिा नहीं होगी।’’ बारी साहब ने हंसते हुए कहा, ‘‘अब आप ऊपरी कक्षा में प्रवेश कर रहे हैं।’’ उस दिन शाम के समय बारी साहब ने मुझे कचहरी में बुलाया। मुझसे हुए संभाषण से उन्हें ज्ञात हो चुका था कि राजबंदियों की हड़ताल से मेरी सहानुभूति थी और हड़ताल तथा निर्भीक आचरण की उद्दंड, अशिष्ट तथा मूर्खता के प्रतीक-रूप में