क्या करूं? ऊपर से मिले आदेश का मुझे पालन तो करना ही चाहिए। लिखित आॅर्डर आया है कि आपको कोल्हू ही दिया जाए। फिर भी मैंने इतना किया कि आपकी योग्यता के बारे में बताकर आपको सुपरिंटेंडेंट द्वारा केवल चैदह दि नही कोल्हू का काम दिलवाया। अन्य बंदियों जैसा बार-बार नहीं दिलवाऊंगा। हां, आप मना मत कीजिए। जाइए, खड़े हो जाइए। मैं यथासंभव आपकी सहायता करूंगा। परंतु दंड मत भुगतिएगा।’’ मैंने कहा,
‘‘पहले ही हमारा जीवन मटियामेट हो चुका
क्या करूं? ऊपर से मिले आदेश का मुझे पालन तो करना ही चाहिए। लिखित आॅर्डर आया है कि आपको कोल्हू ही दिया जाए। फिर भी मैंने इतना किया कि आपकी योग्यता के बारे में बताकर आपको सुपरिंटेंडेंट द्वारा केवल चैदह दि नही कोल्हू का काम दिलवाया। अन्य बंदियों जैसा बार-बार नहीं दिलवाऊंगा। हां, आप मना मत कीजिए। जाइए, खड़े हो जाइए। मैं यथासंभव आपकी सहायता करूंगा। परंतु दंड मत भुगतिएगा।’’ मैंने कहा,
‘‘पहले ही हमारा जीवन मटियामेट हो चुका