होंगे। कई बार उनका शरीर ठोकर खाकर लड़खड़ाया होगा। बात करने का दूसरा साधन वह जाली थी जो कोठरी की भीत से सटाकर दीवार में गहरी बैठाई हुई थी। कुछ इस तरह कि दूसरी तरफ कोठरी से कुछ भी न दिखे, परंतु हवा के लिए स्ािान हो। इस जाली के पीछे की ओर कभी-कभी इस विभाग के बंदियों को भोजन करने बैठाया जाता था, फिर क्या, अवसर मिलते ही हम उस जाली के छेदों पर इधर से मुंह लगाकर और हमारे उधर के सहबंदी भोजन की थाली के साथ बैठकर स्वस्थचित्त नहीं तो आशंकापूर्वक,
होंगे। कई बार उनका शरीर ठोकर खाकर लड़खड़ाया होगा। बात करने का दूसरा साधन वह जाली थी जो कोठरी की भीत से सटाकर दीवार में गहरी बैठाई हुई थी। कुछ इस तरह कि दूसरी तरफ कोठरी से कुछ भी न दिखे, परंतु हवा के लिए स्ािान हो। इस जाली के पीछे की ओर कभी-कभी इस विभाग के बंदियों को भोजन करने बैठाया जाता था, फिर क्या, अवसर मिलते ही हम उस जाली के छेदों पर इधर से मुंह लगाकर और हमारे उधर के सहबंदी भोजन की थाली के साथ बैठकर स्वस्थचित्त नहीं तो आशंकापूर्वक,