परंतु एकाग्रचित्त होकर बातें करते।
कारागार का टेलीफोन
वह जाली यानी कारागृह का टेलीफोन। उस जाली अर्थात् ‘दूरभाष’ में बोलने का कोई अवसर किसी के आस-पास न होने अथवा भरोसेमंद व्यक्ति के होने के कारण ही आता था। इस तरह की सूचना देने के लिए हाथ में पकड़ी भोजन की थाली को उन
सलाखों पर खड़खड़ मारना ही ध्वनिवाह (दूर ध्वनि) की घंटी बजाना समझा जाता था। लेकिन जब इस ध्वनिवाह द्वारा दुष्क्र होने लगा तब एक ‘टेलीफोन’ भी राजबंदियों को ढूंढ़ना पड़ा। वह टेलीफोन कौन सा था,
परंतु एकाग्रचित्त होकर बातें करते।
कारागार का टेलीफोन
वह जाली यानी कारागृह का टेलीफोन। उस जाली अर्थात् ‘दूरभाष’ में बोलने का कोई अवसर किसी के आस-पास न होने अथवा भरोसेमंद व्यक्ति के होने के कारण ही आता था। इस तरह की सूचना देने के लिए हाथ में पकड़ी भोजन की थाली को उन
सलाखों पर खड़खड़ मारना ही ध्वनिवाह (दूर ध्वनि) की घंटी बजाना समझा जाता था। लेकिन जब इस ध्वनिवाह द्वारा दुष्क्र होने लगा तब एक ‘टेलीफोन’ भी राजबंदियों को ढूंढ़ना पड़ा। वह टेलीफोन कौन सा था,