उसे अर्थहीन घोषित कर फंेक दिया जाता। समझने योग्य हो, परंतु उसमें ‘नेशन’, ‘कंट्री’ जैसा एकाध शब्द भी हो तो उसे राजद्रोह घोषित करते हुए प्लेग के कीटाणु की तरह त्याज्य, अछूत समझकर तिजोरी में बंद कर दिया जाता। बारी साहब का कहना ही था-‘‘यह कंट्री-शंट्री की पुस्तकें हम नहीं देख सकते, क्योंकि इन्हीं पुस्तकों ने नृशंस हत्यारे निर्मित किए हैं और योगादि की भोली-भाली थियोसाॅफी की पुस्तकें, वे भी वास्तव में नहीं देनी चाहिए। परंतु क्या करें, सुपरिंटेंडेंट सुनता नहीं,
उसे अर्थहीन घोषित कर फंेक दिया जाता। समझने योग्य हो, परंतु उसमें ‘नेशन’, ‘कंट्री’ जैसा एकाध शब्द भी हो तो उसे राजद्रोह घोषित करते हुए प्लेग के कीटाणु की तरह त्याज्य, अछूत समझकर तिजोरी में बंद कर दिया जाता। बारी साहब का कहना ही था-‘‘यह कंट्री-शंट्री की पुस्तकें हम नहीं देख सकते, क्योंकि इन्हीं पुस्तकों ने नृशंस हत्यारे निर्मित किए हैं और योगादि की भोली-भाली थियोसाॅफी की पुस्तकें, वे भी वास्तव में नहीं देनी चाहिए। परंतु क्या करें, सुपरिंटेंडेंट सुनता नहीं,